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Difference between Hindic and other religions हिंदवी और अन्य धर्म के बीच अंतर


विवरण

All religions in the world can be divided in two groups i. e, Hindic and Judaic:- 1 :-Hindic family of religions : All religions that originated in India ,i.e.; Hinduism, Jainism, Buddhism and Sikhism fall in this category. The Hindic view of life is cyclical . There is no beginning and no end but a continuing, unending cycle of births, deaths and rebirths. There is no heaven or hell (although Hinduism has words like swarg for paradise and nark for hell) but reward for good deeds and punishment for evil acts are meted out in the form in which a person will be reborn. Moksha (salvation i. e.; release from the cycle of rebirth impelled by the law of karma) or release from samsar/sansar (world) and union (yoga) with the infinite that is God is the ultimate objective of life. For the evil it will be a purgatory of rebirth in all the 84 lakhs forms of life (yoni) before release is granted. 2 :- Judaic family of religions – It includes Judaism, Christianity and Islam .The Judaic group maintains that God created the world, sent out Adam and Eve to propagate the human race and created all other forms of life. This group believes that one day, all life on earth will end and there will be a Day of Judgement when people will rise from their graves to be judged for the good or evil they did in life and accordingly they will be sent to heaven or hell. Thus Judeo-Christian-Muslim view of life is linear ,that means it has a beginning, a middle and an end. हिंदवी और अन्य धर्म के बीच अंतर दुनिया के सभी धर्मों को दो समूहों अर्थात हिन्दिक और जूदाईस्म में बांटा जा सकता है:- 1. हिन्दिक धार्मिक परिवार:- भारत में उत्पन्न सभी धर्मों अर्थात हिन्दू धर्म, जैन धर्म, बौद्ध धर्म और सिख धर्म इस श्रेणी में आते हैं। हिन्दिक धर्मों का जीवन दर्शन चक्रीय विचार रखता है । वहां न तो सृष्टि का कोई आरंभ और न ही कोई अंत है, परन्तु जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म का एक सतत् और अंतहीन चक्र है। वहां न कोई स्वर्ग या नरक है (हालांकि हिन्दू धर्म में परलोक के लिए स्वर्ग और यमलोक के लिए नरक शब्द है) परन्तु अच्छे कर्मों के लिए प्रतिफल और बुरे कृत्यों के लिए दण्ड इस रूप में समझाया गया है कि किसी व्यक्ति का पुनर्जन्म किस जीव में होगा ( 84 लाख रूपों में पुनर्जन्म) । मोक्ष (मुक्ति अर्थात् कर्म के सिद्धांत द्वारा प्रेरित पुनर्जन्म के चक्र से) जन्म की अंतहीन चक्र से मुक्ति , कि जीवन का परम उद्देश्य ईश्वर में विलय हैं। 2. जुदाईस्म धार्मिक परिवार - इसमें यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम धर्म हैं। जुदाईस्म समूह यह मानते हैं कि ईश्वर ने संसार का सृजन किया है, मानव जाति का वंश बढ़ाने के लिए मनु और ईडा को भेजा और जीवन के सभी अन्य रूपों का सृजन किया है। इस समूह का यह मानना है कि एक दिन पृथ्वी पर जीवन का अंत हो जाएगा और प्रलय का दिन आएगा जब जीवन में उनके द्वारा किए गए अच्छे अथवा बुरे कर्मों का न्याय करने के लिए लोग अपनी क्रब से उठेगें और तद्नुसार उन्हें स्वर्ग अथवा नरक भेजा जाएगा। इस प्रकार जुदेव-ईसाई-मुस्लिम जीवन का दर्शन रेखाकार है जिसका अर्थ यह एक शुरुआत, एक मध्य और एक अंत है। क्या आप जानते हैं ? हिन्दुओं में ( सिख, बौद्ध , जैन जैसे हिन्दवी धर्म सहित ) विवाह एक पवित्र धार्मिक अनुष्ठान होता है जबकि ईसाईयों तथा इस्लाम में यह एक संविधा अर्थात दो लोगों के बीच एक अनुबंध मात्र है. इस प्रकार हिन्दुओं मैं विवाह विच्छेद का कोई विधान नहीं है। इसी लिए हिन्दुओं में विवाह एक संस्कार है और यह अत्यंत महत्वपूर्ण है.Do you know:- Marriage among Hindus ( including Jain , Sikh and Buddhists) is a sacrament , a religious act . Whereas in Islam and christianity marriage is simply a contract between two individuals. Therefore , there is no provision for divorce in Hindu Dharma whereas it is a simple process in those religions .

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