Hindu Purohit Sangh
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हिन्दू पुरोहित संघ- मिशन क्षेत्र The Mission Areas of Hindu Purohit Sangh


विवरण

हिन्दू समाज की रीढ़ के रूप में एक पुरोहिती व्यवस्था की स्थापना हेतु हिन्दू पुरोहित संघ की स्थापना की गई है । यह एक संस्था के रूप में सोसाइटीज़ रजिस्ट्षन एक्ट 1860 के अंतर्गत संघ पंजीकृत है । संघ अपनी वेबसाइट www.hindupurohitsangh.com तथा Facebook पेज facebook/hindu.purohitsangh के ज़रिये पण्डित, पुजारी, अर्चक, भगत, ओझा आदि नामों से जाने वाले इस वर्ग को आपस में जोड़ने की कोशिश कर रहा है । पुरोहिती व्यवस्था में सुधार हेतु एक आन्दोलन चलाना भी इस संस्था का एक उद्देश्य है । प्रमुख लक्ष्य:- 1. एक सुदृढ़, समावेशी, सुलभ एवं सार्थक व्यवस्था की स्थापना करना जो पुरोहिती व्यवस्था को वांछनीय प्रतिश्ठा प्रदान करें । एक ऐसी व्यवस्था जिसमें पुरोहित सर्वसुलभ हों, योग्य हों तथा सामाजिक व धार्मिक उन्नयन हेत समर्पित हो । 2. समाज और पुरोहित वर्ग के बीच सतत् संवाद स्थापित करना । 3. पुजारियों की भूमिका और क्षमताओं को बढ़ाने हेतु बहुआयामी प्रयास करना । 4. कमान की श्रृंख्ला वाले पुरोहत तन्त्र की स्थापना करना जिसमें शंकराचार्य के समग्र नेतृत्व में एक सम्पूर्ण व्यवस्था बनाई जाएगी । जिसमें शीर्ष में शंकराचार्य मण्डल होगा फिर महामण्डलेश्वर व मण्डलेश्वर तदुपरान्त महन्त और फिर पुरोहित-पुजारी-साधु वर्ग । 5. इस पेशे को आर्थिक रूप से जीविकोपार्जन के योग्य बनाना । 6. पुजारियों के लिए प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना करना तथा इस संस्थानों को संगठित होने हेतु एक माध्यम बनाना । 7. पुरोहित व्यवस्था को मानकीकृत और प्रासंगिक बनाने के लिए पुरोहिती षोध संस्थान स्थापित करना । यह संस्थान संस्कार, पूजा के तरीकों, आरती आदि को अधिक प्रासंगिक तथा समसामयिक बनाने जैसे विशयों पर अनुसंधान करेगा । 8. देश-विदेश की रिक्तियों को भरने हेतु पुरोहितों को तैयार करना तथा रिक्तियों वाली संस्थाओं व पुरोहितों के बीच एक कड़ी की तरह काम करना । 9. पुरोहित पेशे को समावेषी बनाना और वंचित जातियों और महिलाओं को इस पेशे में लाने का प्रयत्न करना । 10. ‘संस्कृति कक्षायें’ प्रारम्भ करना जो बच्चों को धर्म से जोड़ेंगी । विभिन्न इलाकों में 8-00-09-30 के बीच हर रविवार को ऐसी कक्षायें आयोजित की जाएगी। यह लोगों की पहल के माध्यम से किया जाएगा । पाठ्यक्रम और अन्य विवरण संघ द्वारा प्रदान किया जाएगा । 11. www.hindupurohitsangh.com में अधिक से अधिक पुरोहितों को रजिस्टर करना । 12. समान उद्देष्यों हेतु कार्यरत तमाम संस्थाओं के बीच संवाद स्थापित करना । 13. बुनियादी संरचना को प्रभावित किए बिना, कुछ बाद के शास्त्रों में आए जाति और महिला संबंधित संदर्भां जो नकारात्मक और अप्रासंगिक तथा स्वार्थी तत्वों द्वारा बाद में जोड़े लगते हैं, उन्हें अलग करना । पुरोहित संघ के संस्करण वाली पुस्तक सिरीज़ निकालना । 14. पुराहितों का अखिल भारतीय सम्मेलन बुलाना जिसमें विभिन्न विषयों पर वार्तालाप हो सके । 15. हिन्दुओं के बीच समन्वय और कुटुम्ब भावना विकसित करने के लिए ‘संध्या सत्संग मिलन’, ‘महा आरती’ व ‘सामुदायिक पूजा’ कार्यक्रम प्रारम्भ करना । यह पुरोहित और समुदाय के सदस्यों की भागीदारी से देश में अलग-अलग इलाकों में और विदेषों में आयोजित होंगे । ऐसी वैदिक संध्या और सत्संग मिलन सामुदायिक केन्द्र, पार्क, मन्दिरों, नदी किनारों या अन्य किसी शान्त जगह में आयोजित किये जाऐंगी । पुरोहित संघ मिलन कार्यक्रम के लिए विषय-वस्तु तथा प्रक्रियात्मक दिशा-निर्देश हेतु सहायता प्रदान करेगा ।The Purohit Sangh has been established with multi-pronged objectives and it is also a step towards reforms in the existing system. (1) Establish better communication between society and priestly class. (2) Increase the role and capabilities of priests. (3) Bring the priestly class under the chain of command and make them an inclusive and cohesive community To establish hierarchy of Hindu Religious Leadership under overall leadership of all the four Shankaracharyas. The Purohits and Pujaris in different areas will be brought under separate jurisdictions of Shankaracharya Mandal, Mahamandleshwars and Mahants . (4) Make this profession more respectable and economically viable. (5) Improve job prospectus for priests in India and Abroad by better linkages and capability enhancement. (6) Establish Training Institutes for priests and make that institute a rallying point for them. (7) Establish a Center for Research on Purohiti, Karmakanda, Sanskara, Puja Methods, Aarti, etc for making the system people friendly, cohesive, standardized and uniform and relevant. (8) Make the priestly profession inclusive and broad based by focus on deprived castes and women. Encourage purohits to focus on attending rituals in the houses of deprived sections of society. (9) Open more and more Shanskar Classes which will focus on making children conversant with Hindu way of life, religion culture, scriptures, practices, values and mooring. The Sanskriti Class will be held every Sunday between 8:00 to 9:30 AM in various localities in different places on voluntary basis. This will be through people’s initiatives. Curriculum and other details will be provided by the Sangh. 10. Register more and more priests as members in www.hindupurohitsangh.com 11. Establish linkages between individuals and institutions having common objectives 12. Bring out Book series after editing books on Prayers, Karmakanda, Sanskara by removing negative connotations on caste and references on Sati etc. without affecting the basic structure. 13. Hold an All India Conference of Purohits to debate on various topics :- (a) How to make this profession more relevant, meaningful, accessible (b) How to make the profession economically viable and how to penetrate among new and deprived sections (c) How to establish better communication between Purohits community 14. Train Purohits to fill vacancies of Purohits and priests in foreign countries. 15. Start Sandhya Satsangh Milan programs to develop communion and kutumb feeling among Hindus. A daily get together programme is being conceptualised . They will be organised in different localities in the country and abroad on voluntary basis, through participation of purohit and other community member. Vedik Sandhya and Satsangh Meet will be organized in community centers, parks, temples or any other peaceful place. Purohit Sangh would provide study material and issues procedural guidelines for this get together programme.

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