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पाखंडी गुरूओं के कारण मुर्झाई पुरोहिती व्यवस्था Just Surrender to Iswara


विवरण

आज कई धर्मगुरु ठगी, बलात्कार, दलाली से लेकर हत्या तक के किसी न किसी गम्भीर आरोप में फंसे हैं । इन्होंने भगवान् के नाम का सहारा लेकर अपराध किया है, हिन्दू धर्म को अपयस पहुचाया । ऐसे ढ़ोंगी साधुओं की सूची लम्बी है । आखिर हिन्दूओं में ही ऐसा क्यों हुआ ? आखिर ये लोग जो ‘गुरू ब्रह्मा, गुरू विष्णु, गुरू देव महेस्वरः’ के पाठ से अपने अनुयाईयों से अपनी पूजा करवाते हुए दिन का प्रारम्भ करते हैं, कैसे पनपे ? यह आदर्शविहीनता इस महान धर्म में कैसे फैली और हम किधर की ओर बढ़ रहे हैं । इन मुद्दों पर गहन विमर्श की आवश्यकता है । तथापि, हमारी सोच कुछ निम्नलिखित निष्कर्षों पर पहुंचती है । इनमें एक भी स्वामी ऐसा नहीं है जो किसी गुरूकुल की उपज हो, जिसे धर्म ग्रन्थों का ज्ञान हो तथा जिसे शास्त्र सम्मतशिक्षा प्राप्त हो । ऐसे गुरूओं, स्वामियों व आश्रमों का उद्भव, काफी सीमा तक पुराहित संस्था के मुरझाने के लिए जिम्मेदार है अर्थात् इन स्वामियों का उत्थान पुरोहितों की कीमत पर हुआ है । इनकी अनन्त सम्पदा पुराहितों को भुखमरी की स्थिति मे लाने के लिए जिम्मेदार है । पुरोहितों-पुजारियों के विपरीत ये लोग हिन्दू धर्म की मूल स्थापनाओं से विपथ रहे हैं । इन्होंने स्वयं को ईश्वर का स्थान देकर भोले-भाले हिन्दुओं को भ्रमित किया तथा उनकी धर्म के प्रति आस्था का शोषण करके हिन्दू धर्म से धोखा किया । इन ढ़ोंगी स्वामियों ने श्रद्धालुओं द्वारा हिन्दू धर्म दिश्ट दक्षिणा व धन का दुरूपयोग करके इसे अपने लिए विलासिता की वस्तुओं को खरीदने में लगाया और ऐषो-आराम के आश्रम बनाये । हिन्दू धर्म में अनुदान लेने वाले किसी संस्था के अभाव में ऐसा संभव हुआ (जो हिन्दू धर्म के लिए दी गई थी वो सम्पदा इनके हाथों पहुंची) ।एक आंकलन के अनुसार केवल इन आठ-दस बाबाओं की सम्पत्ति एक लाख करोड़ रूपया तक है ( जबकि हिन्दू धर्म के पास कुछ भी राषि नहीं है )। इसलिए इनके द्वारा जुटाई सम्पत्ति असल में हिन्दू धर्म की सम्पत्ति है। हिन्दुओं की पारम्परिक धार्मिक कड़ी - शंकराचार्य, महामण्डलेश्वर, मण्डलेश्वर, महन्त व पुरोहित-पुजारी-साधु- में ये कहीं नहीं आते । आज आवश्यकता अनुशासन लाने की है तथा जनता को सचेत करने की है । लोग धर्म सम्मत हों, शास्त्र सम्मत हो और इस बाबाओं और पाखंडी गुरूओं के चंगुल से बचें, इसकी बड़ी जिम्मेदारी पुरोहित-पुजारी वर्ग के कंधों पर है । व्यास पीठ पर बैठने का अधिकार गृहस्त पुरोहित को ही है । “योगक्षेमं वहाम्यहम्” (Yogakshemam Vahamyaham) . Go to Ishwara."sarva-dharman parityajya mamekam saranam vraja aham tvam sarva -papebhyo moksayisyami ma sucah" Mean:"सर्व धर्मान परित्यज्य मामेकं शरणम ब्रजः " "Abandon all varieties of religion and just surrender unto Me. I shall deliver you from all sinful reactions. Do not fear". Thus the Lord takes all responsibility for one who surrenders unto Him, and He indemnifies such a person against all reactions of sins. Hindi Mean: "सब धर्मों को त्याग कर एकमात्र मेरी ही शरण में आओ l मै तुम्हें समस्त पापों से मुक्त कर दूंगा l तुम डरो मत l गुरु कैसा हो ---“आप जिस ब्यक्ति को अपना गुरु चुनें उसका चरित्र बेदाग और अनुकरणीय होना चाहिए। वह बिल्कुल नि: स्वार्थ हो और वासना और लालच से मुक्त हो। उसे वेदों और शास्त्रों का ज्ञान हो । उसे आध्यात्मिक ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार हो और आध्यात्मिक पथ में आप का नेतृत्व करने में सक्षम हो । एक असली गुरु ब्रह्मा-निष्ठ और ब्रह्मा-श्रोत्रि होता है। आपके संदेह दूर कर सकने में सक्षम होता है। उसे सम्यक दृष्टि होती है, वह दया का सागर है, राग-द्वेश, हर्ष, शोक, अहंकार, क्रोध, वासना, लालच, मोह, गर्व , आदि से मुक्त है। उसकी उपस्थिति मात्र से शांति और मन की ऊंचाई प्राप्त हो जाती है। उसे किसी से कुछ भी उम्मीद नहीं है। वह एक अनुकरणीय चरित्र वाला तथा खुशी और आनंद से भरा होता है। लेकिन मुझे कारोबारी गुरु नापसंद हैं। मुझे गुरुओं और आचार्यों के भेस में कपटी लोग, जो चेलों की जमात और पैसा इकट्ठा करने में लगे हैं, से नफरत है । इस बात में कोई दोराय नहीं हो सकती। वे समाज के कीड़े हैं। गुरुवाद ( Gurudom) मात्र व्यवसाय है और इसे अच्छी तरह से भारत की धरती से खत्म किया जाना चाहिए। यह भारत के लोगों के लिए खोफनक तबाही और नुकसान कर रहा है। यह पश्चिमी देशों और विभिन्न देशों के लोगों के मन में भारत के प्रति एक बहुत ही बुरा प्रभाव पैदा कर रहा है। भारत इस गुरुवाद के व्यापार के कारण अपनी आध्यात्मिक महिमा खो रहा है। इस गंभीर रोग को नष्ट करने के लिए तुरंत कठोर कदम लिए जाने चाहिए। इसके उन्मूलन के हर संभव प्रयास होने चाहिए । यह एक घृणित आकार ग्रहण कर चुका है। यह बहुत ही संक्रामक बन गया है। कईयों ने इसे आजीविका का एक आसान साधन के रूप में व्यापार बना लिया है। गरीब , और अज्ञानी लोगों , का एक विशाल पैमाने पर , इन छद्म गुरुओं द्वारा शोषण के शिकार रहे हैं। कितने शर्म की बात है! बेहतर होगा की आप भगवान कृष्ण, राम, शिव को अपने गुरु के रूप में अपने दिल की धारण करें । उनका मंत्र दोहराए और गुमराह कर रहे इन काले भेडियों से इस देश के लोगों को बचाएं । ईश्वर मेरे देश को आदि शंकर और श्री दत्तात्रेय की तरह के गुरु दे । ईश्वर इन छद्म गुरुओं के अभिशाप से मेरे देश को मुक्त करे । वह सनातन धर्म के सार्वभौमिक सिद्धांतों को विश्व में फेलाए । सभी आध्यात्मिक नेता विभिन्न संप्रदायों को एकजुट करने के लिए अपने स्तर पर कोशिश करें । उन्हें नए पंथों की स्थापना नहीं करनी है । हमेशा के लिए पंथों की लड़ाई समाप्त हो । इस देश को हमेशा संतों, ज्ञानिओं , त्यागियों , योगियों, भक्तों और संन्यासियों के एक आध्यात्मिक देश के रूप में जाना गया है । दुनिया भर में एकता, शांति और सद्भाव हो , ईश्वर हमें अध्यात्म की राह में ले चलें ।“ --- स्वामी शिवानंद

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