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Hindoos are most serenely and thoughtfully religious हिन्दू धर्म हिब्रुओं की तुलना में अत्यन्त निर्मल एवं भव्य दर्शन


विवरण

महान दार्शनिक हेनरी डेविड थोरो के शब्दों में -: "हिन्दू धर्म हिब्रुओं की तुलना में अत्यन्त निर्मल एवं भव्य दर्शन है । हिन्दुओं के पास शायद अधिक शुद्ध तथा सम्पूर्ण चिन्तन वाला ईष्वरीय ज्ञान उपलब्ध है । हिन्दुओं की धार्मिक किताबें अधिक जिज्ञासु तथा विचारवान हैं । जिस शांति तथा सौम्यता के साथ हिन्दू ईष्वरीय विषयवस्तु को छूते हैं वह अनुपम है" “The Hindoos are most serenely and thoughtfully religious than the Hebrews. They have perhaps a purer, more independent and impersonal knowledge of God. Their religious books describes the first inquisitive and contemplative access to God…The calmness and gentleness with which the Hindoo philosophers approach and discourse on forbidden themes is admirable” Henry David Thoreau (1817-1862) सनातन धर्म की सार्वभौमिकता के बारे में इन पश्चिमी दर्शनिकों ने क्या कहा है: 1.लियो टॉल्स्टॉय (1828 -1910): "हिन्दू और हिन्दुत्व ही एक दिन दुनिया पर राज करेगी क्योंकि इसी में ज्ञान और बुद्धि का संयोजन है"। 2. हर्बर्ट वेल्स (1846 - 1946): " हिन्दुत्व का प्रभावीकरण फिर होने तक अनगिनत कितनी पीढ़ियां अत्याचार सहेंगी और जीवन कट जाएगा तभी एकदिन पूरी दुनिया उसकी ओर आकर्षित हो जाएगी और उसी दिन ही दिल शाद होंगे और उसी दिन दुनिया आबाद होगी सलाम हो उस दिन "। 3.अल्बर्ट आइंस्टीन (1879 - 1955): "मैं समझता हूँ कि हिन्दूओ ने अपनी बुद्धि और जागरूकता के माध्यम से वह किया जो यहूदी न कर सके, हिन्दुत्व मे ही वह शक्ति है जिससे शांति स्थापित हो सकती है"। 4. हसटन स्मिथ (1919): "जो विश्वास हम पर है और इस हम से बेहतर कुछ भी दुनिया में है तो वो हिन्दुत्व है । अगर हम अपना दिल और दिमाग इसके लिए खोलें तो उसमें हमारी ही भलाई होगी"। 5. माइकल नोस्टरीडाम (1503 - 1566): " हिन्दुत्व ही यूरोप में शासक धर्म बन जाएगा बल्कि यूरोप का प्रसिद्ध शहर हिन्दू राजधानी बन जाएगा"। 6.बर्टरांड रोसल (1872 - 1970): "मैंने हिन्दुत्व को पढ़ा और जान लिया कि यह सारी दुनिया और सारी मानवता का धर्म बनने के लिए है, हिन्दुत्व पूरे यूरोप में फैल जाएगा और यूरोप में हिन्दुत्व के बड़े विचारक सामने आएंगे । एक दिन ऐसा आएगा कि हिन्दू ही दुनिया की वास्तविक उत्तेजना होगा "। 7. गोस्टा लोबोन (1841 - 1931): " हिन्दू ही सुलह और सुधार की बात करता है । सुधार ही के विश्वास की सराहना में ईसाइयों को आमंत्रित करता हूँ"। 8.बरनार्डशा (1856 - 1950): "सारी दुनिया एक दिन हिन्दू धर्म स्वीकार कर लेगी, अगर यह वास्तविक नाम स्वीकार नहीं भी कर सकी तो रूपक नाम से ही स्वीकार कर लेगी। पश्चिम एक दिन हिन्दुत्व स्वीकार कर लेगा और हिन्दू ही दुनिया में पढ़े लिखे लोगों का धर्म होगा "। 9. जोहान गीथ (1749 - 1832): "हम सभी को अभी या बाद मे हिन्दू धर्म स्वीकार करना ही होगा । यही वास्तविक वैज्ञानिक धर्म है जहाँ मानवीयता कॊ सर्वोपरी प्रत्येक द्रष्टिकोण से रखा जाता है

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