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भारत में खेलो के प्रोत्साहन हेतु पुरोहिती दृष्टि Sports from Hindu the view point of Priests


विवरण

भारत में खेलो के प्रोत्साहन हेतु पुरोहिती दृष्टि - विश्व का प्रथम खेल स्टेडियम आज से लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व भारत में गुजरात स्थित धौलावीरा नामक जगह पर बना । यह स्टेडियम विशाल था जिसमें दस हजार दर्शकों के बैठने की सुनियोजित व्यवस्था थी । तात्पर्य यह है कि खेलों के प्रति रूचि का इतिहास बहुत पुराना है । "शरीर माध्यम खलु धर्म साधनमश्" कहकर भारतीय मनीषियों ने स्वास्थ्य को देहिक ही नही वरन दैविक व भौतिक उत्थान की भी कुंजी कहा है । गरुड़ पुराण में अनेक श्लोक आये हैं जो शरीर संरक्षण को देव पूजा से भी अधिक महत्व देते हैं इस महान संस्कृति के उत्थान हेतु खेलों का उन्नयन आवस्यक है । खेलों में उत्कृष्टाता प्राप्त करना, भारत को विश्व में श्रेस्ट स्र्पोटिंग देश के रूप में स्थापित करना, खेलों से राष्ट्रीय भावना, एकता, अखण्ड़ता तथा राष्ट्रीय गौरव पैदा करना, जन स्वास्थ्य तथा चरित्रिक उत्थान, इस क्षेत्र में हमारा प्रमुख उद्देश्य हो | इसी प्रकार ओलम्पिक, एशियाई तथा विश्व प्रतिस्पर्धाओं में आने वाले खेलों के अतिरिक्त भारत में लोकप्रिय खेलों को बढावा देना भी इसी कड़ी में आता है । व्यायाम, योग, ध्यान तथा प्रणायाम की भारतीय परम्परा को हर आयु वर्ग की आवस्यकताओं के अनुरूप प्रोत्साहन देकर देश में स्वास्थ्य एवं सद्भाव तथा समाजिक समन्वय स्थापित हो ऐसा हमारा प्रयास रहे । इसी प्रकार बच्चे खेलों के प्रति आकृश्ट हों तथा उनकी खेल क्षमता चिन्ह्ति हो तथा उसे उभारने का प्रयास होता रहे इसके लिए हम कार्यरत रहें । लक्ष्य: 1. एक अखिल भारतीय संगठन तैयार करना, जिसकी शाखाएं जिला, तहसील तथा पंचायत स्तर तक हों । बडे शहर में जोन तथा मोहल्ला (वार्ड ) स्तर तक का संगठन बने । संगठन की कार्यकारणी में 50 प्रतिषत तक पदों पर वर्तमान एवं पूर्व खिलाडि़यों को स्थापित करना, जिसमें महिला तथा पुरुष भागीदार लगभग समान अनुपात में रहे । कार्यकारणी हेतु हर तीन वर्ष में चुनाव हों । 2. खेलों को चार कोटियों में रखकर प्रोत्साहन दिया जाए जो इस प्रकार हैं:- 1. ओलम्पिक, एशियाई , काॅमनवेल्थ तथा विश्व प्रतिस्पर्धा में स्थान पाने वाले खेल। 2. योग सहित भारत में, विषेशतः ग्रामीण एवं दुर्गम पहाड़ी व आदिवासी क्षेत्रों मे लोकप्रिय खेल । 3. पैरा एथलीट, मानसिक रूप से चुनौती वाले बच्चे, बधिर व नेत्रहीन खिलाडि़यों को प्रोत्साहन देने वाले खेल । 4. विभिन्न आयु वर्ग के व्यक्तियों हेतु स्वास्थ्य लाभ, मनोरंजन तथा आरोग्यता प्रदान करने वाले खेलों । 3.खेल परिसंरचना: खेलों के विकास हेतु इंड़ोर व आउटड़ोर आधारभूत सुविधाओं जैसे मैदान, कोर्ट, ट्रैक, बहुउद्देशीय हाल, जिमनेजियम के विस्तार हेतु सतत् प्रयास करना । एक ऐसी व्यवस्था हेतु कार्य करना जिसमें खेल सुविधाएं सर्वसुलभ हों और जिसमें खेल परिसंरचना का विकास पिरामिड़ की तरह हो । किसी भी राज्य में खेल सुविधाओं का संतुलित विकास हो । लोकप्रिय खेलों की सामान्य सुविधाएं, वा्र्ड़, पंचायत, गांव व जनजातिय क्षेत्रों में सुगमता से उपलब्ध हों । जबकि विषेश सुविधाएं ब्लाक व जिला स्तर पर हों । उच्च कोटी की सुविधाएं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की होंगी, वे राज्य स्तर पर एरिया के क्षेत्रफल तथा जनसंख्या को देखते हुए हों । इस प्रकार खेल परिसंरचना पिरामिड़ की तरह होंगी अर्थात् जहां सिंथैटिक टृ्रैक तथा उत्कृश्ट सुविधायें प्रमुख स्थानों तक सिमित होंगी वहीं मिट्टी व घास के टृ्रैक, कोर्ट व फील्ड़ की बहुतायत होगी । इन सुबिधाओं को उपलबध कराने हेतु प्रयास करना । 4. सुविधाओं के विकास में उस क्षेत्र में लोकप्रिय खेलों को विषेश रूप से ध्यान में रखा जाए । जनजातीय क्षेत्रों में प्रचलित खेलों पर विषेश ध्यान दिया जाएगा । यह देखा जाए कि उनके स्थानीय खेल का कौशल किस विश्वस्तरीय खेल में उपयोगी सिद्ध होगा और उसी अनुरूप बच्चे का कौशल निखारा जाए । 5. खेलों के लिए उपकरण तथा सामग्री खिलाडि़यों को आसानी से उपलब्ध हो, ऐसा सतत् प्रयास करना । 6. आम जनता तथा खिलाडि़यों को भारत सरकार तथा राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही अनेक योजनाओं के बारे में जागरूक करना जिससे खिलाड़ी इन योजनाओं का लाभ ले सकें । 7. खेलों के प्रोत्साहन हेतु केन्द्र सरकार की मौजूदा नीति के तहत सभी विभागों में व राज्यों तथा निजी क्षेत्र में 5 प्रतिशत तक रिक्तियों में खिलाडि़यों का चयन हो इसके लिए प्रयास करना । 8. खेलों में युवाओं की शक्ति को प्रेरित ; तथा उनके जीवन निर्वाह के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण की ओर उन्हें दिशा देने ; का प्रयास करना । 9. खेल से जुड़े कर्मियों में कौशल को तरासने हेतु संस्थाओं को प्रोत्साहन देना तथा कोच, स्थलश्रमिक, फिजियोथेरापिस्ट, मसाजर आदि हेतु रोजगार के चैनल स्थापित करने हेतु प्रयास करना । प्रशिक्षण केन्द्रों, अकादमियों तथा खेल का सामान बनाने वाले लघु उद्यमियों को इस मुहिम से जोड़ना । 10. खेल विज्ञान, खेल औषधि, खेल मनोविज्ञान आदि के क्षेत्र में आ रहे नवाचार को आत्मसात करना तथा खेलों में हो रहे मादक दवाओं के प्रयोग के उन्मूलन हेतु प्रयास करना । 11. बच्चे खेल के मैदान तक पहुंचे, यह बडी चुनौती है क्योंकि आज इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों में आभासी खेलों की दुनिया में बच्चे सीमित होते जा रहे हैं । इस समस्या से उबरने के लिए अनेक मौलिक कदम उठाना । 12. कम्पनी अधिनियम में आये सीएसआर (CSR) फंड़ के प्रावधान का लाभ लेकर खेलों हेतु संसाधन जुटाने हेतु प्रयास करना । ऐसे खेलों पर विषेश ध्यान देना जिनमें वाणिज्यीकरण की संभावना कम हो । राष्ट्रीय , राज्य व स्थानीय स्तर में स्कूल आधारित व अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन नियमित तौर पर करना तथा ऐसी प्रतियोगिताओं को प्रोत्साहन देना । 13. खेलों के प्रोत्साहन हेतु राष्ट्र तथा राज्य स्तर के निम्नलिख्ति पुरस्कार स्थापित करना:- राष्ट्र स्तर - 1. पवनसुत पुरस्कार (सर्वोच्च) 2.पंतजलि पुरस्कार (उच्च) 3.कार्तिकेय पुरस्कार (श्रेश्ठ) 14. मेधावी खिलाडि़यों को छात्रवृत्ति दी जाए इसके प्रयास करना । 15. हर उस गांव में, जिसमें 25 से अधिक परिवार रहते हों, एक व्यायाम शाला बने जिसमें योग शिविर भी लगाए जाएं । बडे गांवों तथा नगरीय वार्ड में व्यायामशाला के साथ जिमनेजियम भी बनें इसके लिए कार्य करना । सत्संग, व्यायाम, भजनमंड़ली, संध्या - कीर्तन, प्रवचन, योग तथा ध्यान जैसे सामुदायिक समागमों में निहित साॅमन्जस्य को इन स्थलों से निरूपित किया जाए । भारत में प्राचीन समय से मन्दिर परिसर में स्थित बाहुबली व्यायामशाला, अखाड़ा तथा योगशालाओं की प्रथा को प्रोत्साहन देना । मौजूदा संजायत तथा पंचायत गृह इन कार्यों हेतु प्रयोग में आएं, ऐसे प्रयास करना । 16. मौजूदा तथा नये खेल स्टेडि़यम, व्यायामशाला, मैदान, इण्ड़ोर हाल आदि यथा सम्भव खिलाडि़यों के नाम पर हो, इसके लिए प्रयास करना । 17. खेल महासंघों, खेल संघों, भारतीय खेल प्राधिकरण, राज्य स्तरीय खेल परिषद से सहयोग का आदान - प्रदान करना । 18. विभिन्न स्तर की प्रतियोगिताएं तथा प्रतिस्पर्धाएं आयोजित करना । 19. स्कूलों को खेलों की मुख्य नर्सरी तथा केन्द्र बिन्दु मानकर खेल विकाश तथा वहां खेल संरचना तथा उपकरणों की व्यवस्था में सहयोग देना । स्कूलों के अंदर खेलों में उत्कृष्टता प्राप्त खिलाडि़यों को खेल उत्कृष्ट केन्द्रों तक पहुंचाने में सहायता करना । 20. समस्त खेल परिसर विकलांगता ग्रस्त व्यक्तियों की पहुंच में रहें इसके लिए सतत् प्रयास करना । 21. खेल की नई प्रतिभाओं को खोजकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने हेतु प्रयास करना । 22. अभाव में जी रहे पूर्व तथा मौजूदा खिलाडि़यों तथा स्वर्गवासी खिलाडि़यों के पारिवारिक सदस्यों को चिन्ह्ति करके उनकी सहायता करना । 23. खेल प्रशिक्षकों, योग विषेशज्ञों तथा अन्य संवद्ध कर्मियों की नियुक्ति करके उन्हें खेलों के प्रोत्साहन में लगाना । 24. खेलों के प्रति युवाओं में रूचि पैदा हो इसके लिए विविध मौलिक उपाय करना । सभी विश्वविद्यालय तथा काॅलेजों में 5 प्रतिषत सीट उत्कृष्ट खिलाडि़यों हेतु समर्पित हो, ऐसा प्रयास करना । 25. खेलों, योग, व्यायाम, ध्यान तथा प्राणायाम से होने वाले लाभों से जनता को अवगत कराना । 26. केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों में खेल प्रोत्साहन बोर्ड ; ैचवतजे च्तवउवजपवद ठवंतकद्ध का प्रावधान है लेकिन वे निराकृय हैं जिन्हें सक्रिय करवाने हेतु प्रयास करना । 27. तीन स्थान तक के राश्ट््रीय मैड़ल विजेता तथा टीम गेम के विजेता तथा रनरअप को सी जी एच एस ;ब्ळभ्ैद्ध स्कीम का मेडि़कल लाभ मिले, इसके लिए प्रयत्न करना । 28. राश्टृ्रीय, राज्य व स्थानीय स्तर में स्कूल आधारित व अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन नियमित तौर पर करना तथा ऐसी प्रतियोगिताओं को प्रोत्साहन देना । 29. सभी राज्य पुलिस व अर्ध सैनिक बलों में बाॅयज स्र्पोटस कम्पनी की स्थापना करने का प्रयास करना । -6- 30. अखिल भारतीय मैडिकल परिषद , खेल विज्ञान तथा खेल चिकित्सा में पाठ्यक्रम प्रारम्भ करें इसके प्रयास करना । 31. राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र खिलाडि़यों के आंकड़े रखे इसके लिए कार्य करना । आनेवाली जनगणना में खेलों पर भी आंकड़े लिए जाएं जिससे कि जनसंख्या में खिलाडि़यों का प्रतिशत ज्ञात हो सके ।

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