Hindu Purohit Sangh
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पुरोहिताई एक दैवीय वृत्ति है । Hindu Priestly profession is a divine calling


विवरण

The unique thing about Purohiti system is that the purohit has access to the homes of people. This can transform our society provided we broad base the entry level , improve the capabilities of priests,and make the profession a complete means of sustenance.The Hindus have to realise that only a structured and reformed priestly class can help in inculcating the values and keep the fabric of Hindu society intact. The priestly class can function as a nervous system of Hindu society. This can be used as a powerful means for upliftment. साधु संतो की लोकप्रियता एवं पुरोहित भारत में कई साधु संत असीम लोकप्रियता समय समय पर पाते रहे हैं । इसका मुख्य कारण यह है कि उन्होंने अपने द्वार सभी के लिए खुले रखे हैं । हिन्दू धर्म के अन्दर आध्यात्मिक की समता लाने में उन्होंने कांतिकारी योगदान दिया । जबकि पाण्डित्य की परम्परा वाले पुरोहित वर्ग की बहुसख्या ने रूढियों का सहारा लिया, ऐसी रूढियां जो अहम् ब्रहमाश्मि ;(अर्थात् हर जीव को परमात्मा का अंष) की महान संकल्पना से मेल नहीं खाती । लेकिन एक चीज विषेश ध्यान देने योग्य है कि हिन्दू समाज में समतामूलक क्रांति लाने वाले महापुरूश महर्शि दयान्नद सरस्वती एक परम्परावादी पुरोहित परिवार में जन्में ही नही थे बल्कि स्वयं एक पुरोहित थे । लेकिन स्वामी दयानन्द की यह परम्परा अन्य पुराहितों ने क्यों आगे नहीं बढाई ? क्योंकि यह तो सभी के हित में था यह एक सोचनीय विशय है । दक्षिण भारत के कांचिपुरम के षंकराचायों ने जाति आधारित भेदभाव के उन्मूलन की कोषिष की लेकिन यह अन्य षंकराचार्यांे में सर्वाभौमिक रूप से स्वीकार्य नहीं हो पाई । समाज में महिलाआंे की बराबरी भी एक बडा विशय रहा है । समाज पुरोहित वर्ग से नेतृत्व की अपेक्षा करता है । क्या हम तैयार हैं ? बाल साहित्य एवं पुरोहित हमारे देश में पिछली सदी के लेखन में बाल साहित्य की अनदेखी हुई है । भारत के किसी लेखक द्वारा भारतीय मुल्यों एवं धर्म दर्शन तथा पृश्ठभूमि पर आघारित लेखन, जो रोचक हो और बच्चों की कल्पना शक्ति को प्रभावित कर सके, का सृजन नहीं किया गया । पुरोहित इस कार्य के लिए आगे आएं तो वे अपने तरीके का समाज निर्मित करने में सफल होंगे । पुरोहित बच्चों के लिए उत्तम कहानियां लिख सकते हैं क्योंकि उनका परिवेश व्यापक होता है और ऐसा भी देखा गया है कि बच्चों की समझ उनमें उत्कृश्ठ होती है । The popularity of Swamis and Babas vis- a- vis Purohit ( priests):- Many swamis in India are immensely popular . The main reason behind their popularity is that they opened their doors to all, they broke the boundaries of castes. Whereas majority of Purohit community continued with the adulterated interpretation of Varna and caste structure .The phylosiloshy of "aham Brahmasmi " , each soul is part of Iswara was somehow lost in their interpretation of Hindu society. Though this narrow interpretation of varna system and bringing purity and pollution in this, was a further blow.It not only greatly harmed the Hindu society but it was also detrimental to the larger interests of purohit community. Mahrshi Dayannd Saraswati tried to break this caste based fragmentation. He realised the fact that caste was the basic reason for defeat from foreign hands, as a large sections were not allowed to participate in the wars as kshatriya could only participate .Large section of Hindus converted to Islam or Christianity as there was no place for them in our system. Interestingly Swami Dayanand Saraswati was not only born in a conservative family of priest, but was himself a priest. Why the tradition of Swami Dayanand was not carried forward by other purohit ( priestly class) is a intriguing . The Shankaracharyas of Kanchi tried to eliminate caste system and descrimination towards women, but the largely remained confined. Society expects leadership from the clergy. Are we , the Purohits, and temple priests, ready for it ? Today Hinduism is a Global religion and it needs a fresh look. ********वरिष्ठ पुरोहितों को कर्म व संस्कार शिविरों का आयोजन करना चाहिए । हाल में 4 से 10 मई तक विदिशा में श्री महाकालेश्वर महादेव मंदिर एवं महाकालेश्वर संस्कृत पाठशाला में ऐसा शिविर लगा था । इसमें संध्यावंदन, कर्मकांड, वेदमंत्र, ज्योतिष शास्त्र, व्याकरण एवं वास्तु शास्त्र की नि:शुल्क शिक्षा दी जा रही है। शिक्षा में पारंगत हो जाने के बाद छात्र आवश्यकता पडऩे पर अनुष्ठान, कर्मकांड कराकर पुरोहित बन सकते हैं। इन्हें सर्टिफिकेट भी दिए जाने चाहिए .

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