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What is salutation?अभिवादन क्या हो


विवरण

अभिवादन क्या हो -अपने से श्रेस्ट व्यक्ति व विध्वांन को प्रणाम कहें तथा सम कक्षको नमस्कार। दोनों का ही तात्पर्य व्यक्ति में स्थित देवीय शक्ति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना है। नमस्कार का उत्तर नमस्कार दिया जाए तथा प्रणाम के उत्तर में आयुस्मान भवः या दीर्घायु भवः ( विशेषकर बच्चों को ) तथा सुभम, मंगलम , शुभेच्छा, सुभाषिस आदि हो। चरण स्पर्श केवल माता पिता तथा सद्गुरू व आचार्य ( जब वह आशन में हों )के ही करें। मनुष्य में जलती ज्योति जो ब्रह्म का अंश है को नमन किया जाता है । What is salutation? Salutation is directed to the divine light in a human being which represents the Brahmn in him.Pranaam is offered to seniors and scholars whereas Namaskar is offered to equals. Both have a same meaning as they are salutations directed to the divinity that exists in the the soul of a person. Bowing down with Pranaam and Touching feet with Pranaam is further submission which should be reserved to parents and true guru- teacher and Acharya when in the seat ( Astana ). The reply to Pranaam is aayusmaan bhawah or deerghayu bhawah ( wish for your longevity) often to children and subhechha or Mangalam or subham or Subhasis.

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