Hindu Purohit Sangh
शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान
पंजीयन
पुरोहित चर्चा क्षेत्र
पुरोहित चर्चा क्षेत्र
हिन्दू धर्म
हिन्दू मन्दिर
हिन्दू वेद
हिन्दू शिशु नाम
हिन्दू पंचांग एवं पर्व
हिन्दू धार्मिक स्थल
पूजा सामग्री
विषय अनुसार चर्चा क्षेत्र

शीर्षक

यहाँ ईश्वर को ब्रह्म (ब्रह्मा नहीं) कहा गया है


विवरण

हिंदू धर्म में ईश्वर की संकल्पना व्यापक है।यहाँ बहुदेवबाद नहीं है बल्कि एक ईश्वर तक पहुँचने के अनेक रास्ते बताए गए हैं। यहाँ शिव , कृष्ण, माता रूप तो मार्ग मात्र हैं जो सब एक ही जगह पहुँचते हैं। यहाँ ईश्वर को ब्रह्म (ब्रह्मा नहीं) कहा गया है। ब्रह्म एक अमूर्त संकल्पना है । मनुष्य अमूर्त से कैसे जुड़े इसके लिए शिव , देवी आदि स्वरूप दिए गए हैं जिन्हें हम माता व पिता जैसे सम्बंध के रूप में देखते हैं ,क्योंकि मनुष्य आपने को इन सम्बन्धों से जोड़ सकता है। ऐसे रूप जिनसे हमारे लिए सम्बंध जोड़ना सरल है। यह तरल जल को जमाकर उसकी मूर्ति बनाने जैसा है ऐसी मूर्ति जो इंद्रियों की पहुँच में हो । यहाँ ईश्वर सर्वत्र है , मनुष्य में जीवन के रूप में जल रही ज्योति ब्रह्म अर्थात ईश्वर ही तो है। वह माँ की करुणा में है, पिता के वात्सल्य में है , सखा है , सौंदर्य है , निर्धन की सेवा है ,वात्सल्य है ,बाललीला है , बल रूपी हनुमान है , प्रेम रूपी कृष्ण , मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम है , या आप जिस रूप में उसे जाने, जो चुने वो वही है। सब आपको ब्रह्म तक ही ले जाएँगे ।आपको चयन की स्वतंत्रता है ,ब्रह्म तो सर्वत्र है , यह उसी की सृष्टि है ।अतः हिंदू धर्म आपको अपने ईश्वर के चयन तथा निजीकरण की छूट देता है, यहाँ आराधना की स्वतंत्रता है,जो सब स्वतंत्रताओं की जननी है । यहाँ आध्यात्मिक लोकतंत्र है।

==================================

टिप्पणियां



आपका नाम  
संपर्क नम्बर  
विचार  
   


Copyright © Hindupurohitsangh.in